पारले-जी बिस्कुट गर्ल कौन है, कब शुरू हुआ था यह बिस्कुट?



ऐसा शायद ही कोई बच्चा होगा जिसने कभी पारले-जी बिस्कुट ना खाया हो खैर बच्चो की बात क्या हमारे माँ बाप तक यही बिस्कुट खाकर बड़े हुए है। मुंबई के विले पारले में रहने वाले एक चौहान परिवार ने 1929 में एक छोटे से कारखाने की शुरुआत की तब इसमें पारले बिस्कुट नहीं बनता था। 1939 में कंपनी में अपना स्वदेशी बिस्कुट शुरू किया क्योकि भारत में इससे पहले बिस्कुट का निर्माण नहीं होता था। ब्रिटिश कम्पनियाँ ही भारत में बिस्कुट की मांग पूरी करती थी।

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शरुआत में पारले बिस्कुट की छपाई ऊपर दिए फोटो वाली थी और पारले-जी को पारले Gluko के नाम से जाना जाता था। लेकिन 1979 में एक बच्ची का फोटो इस बिस्कुट के ब्रांड के तौर पर लाया गया और Gluko का नाम बदल कर पारले-जी कर दिया गया हलाकि 1939 से लेकर 1979 तक कई बार बिस्कुट की छपाई को बदला गया।
आखिरकार इस फोटो के जरिए ही पारले बिस्कुट को पहचान मिली और आज इसको भारत का हर एक इंसान जनता है। लेकिन किसी को यह नहीं मालूम की आखिर बिस्कुट पर किस लड़की का फोटो है। वैसे अगर आप इसका जबाब इंटरनेट पर सर्च करते हो तो वहां नीरू देशपांडे का नाम सामने आता है और इंटरनेट पर कई जगह फोटो भी वायरल है जिसमे सुधा मूर्ति की. इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी को दिखाया गया है। हलाकि इन दोनों महिलाओं का पारले-जी बिस्कुट से कोई लेना देना नहीं है।

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इंटरनेट पर आपको ऊपर दी हुई महिला को बिस्कुट गर्ल बताया है जिनका नाम नीरू देशपांडे बताया है लेकिन इनका पारले-जी से कोई लेना देना नहीं है।
अफवाहों के आने पर पारले कंपनी के प्रोडक्ट मैनेजर मयंक जैन ने खुद यह खुलासा किया है कि बिस्कुट के पैकेट पर ये किसी असल इंसान की तस्वीर नहीं है यह महज़ इलस्ट्रेशन भर है कई वर्षो पहले 60 के दशक में एक आर्टिस्ट मगनलाल दहिया नाम के एक व्यक्ति ने इस फोटो को तैयार किया था।
उन्होंने बताया इंटरनेट पर जो खबरे दी गई है वह सब गलत है और उन्हें भी नहीं मालूम की आखिर इस तरह की खबरें इंटरनेट पर कहा से आयी है।
पारले-जी बिस्कुट गर्ल कौन है, कब शुरू हुआ था यह बिस्कुट?  पारले-जी बिस्कुट गर्ल कौन है, कब शुरू हुआ था यह बिस्कुट? Reviewed by Author on September 29, 2019 Rating: 5
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